Wednesday, November 12, 2014

kuch ishq ki batein



मेरे दिल में एक सन्नाटा था जो तूने ही सुना था,
मेरी आँखों में एक सपना था जो तूने ही देखा था,
मेरी खुशी का ठिकाना तूने ही ढूँडा था,
मेरे अश्क़ों का पता भी तूने ही बताया है

तुझे ना जाना, ना पेहचाना - अपना बना लिया,
तूने भी इस ज़माने की तरह मेरा तमाशा बना दिया!

निकली थी जिस जहां को पीछे छोड़ के..
ले चले थे जहाँ तुम मेरा रुख मोड के..
ना जाना वहां वापस, ना पहुंचना वहां मुझे..
बस चले मेरा तो रुक जाऊँ मैं यहीं पे!

चल चली मैं एक नये सफर पे,
ले चली सब यादें पिरो के,
मिलेंगे कभी इस राह में खुशी खुशी,
करेंगे तब मिलके बातें नयी पुरानी..

ऐसा लगा ही था की ज़िंदगी का फलसफा मिल गया,
ऐसा हुआ ही था की किसीकी मोहब्बत मिल गयी,
तुझे बताया ही था की दिल में तेरा खयाल बस गया -
की मेरे हाथ से तेरा साथ निकल गया!

तू देखले तूने आज कैसी ये सुबह छेद दी है -
मेरी ज़िंदगी में धूप, तेरी एक कशिश जोड़ दी है -
दूर ना हो जाऊं तुझसे आज इस मौसम में -
मेरे दिल ने आज एक अजब सी हूंक छेद दी है

- स्वाति

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